Ibrahim ki Kahani | Story of Prophet Ibrahim in Hindi



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 Story of Prophet Ibrahim

हेलो दोस्तों कैसे हैं आप लोग मैं भी अच्छा हूं दोस्तों आज मैं इस्लाम के 1 अजीम पैगंबर के बारे में बताऊंगा जो की है पैगंबर इब्राहीम अलैहिस्सलाम ! पैगंबर इब्राहिम ने इस्लाम के लिए बहुत बड़े बड़े काम किए इस्लाम में उनका दर्जा बहुत बुलंद है ! उनके जीवनकाल में अल्लाह पाक ने जो भी हो ने आदेश दिए उन्होंने उसे पूरा किया तो क्या आप तैयार हैं एक सच्ची कहानी पढ़ने के लिए वैसे तो यह पैगंबर की कहानी नहीं पैगंबर का इतिहास है ! तो चलिए शुरू करते हैं कहानी पैगंबर इब्राहिम अलैहिस्सलाम की -

बहुत साल पहले कनान के क्षेत्र में एक इब्राहिम नाम का लड़का रहता था वह बहुत बुद्धिमान और अच्छा लड़का था और वह लोगों से बहुत सारे सवाल पूछा करता था यह उस समय की बात है जब लोग मूर्तियों की प्रार्थना किया करते थे पिछले पैगंबरों ने जो संदेश दिया था उसे भूल चुके थे ! अल्लाह पाक की पूजा करने के बजाय वह लोग अपने हाथों की बनी मूर्तियों की पूजा करते थे ! इब्राहिम के पिता मूर्तिकार थे जो इन मूर्तियों को बनाया करते थे और अल्लाह की इबादत भी नहीं किया करते थे ! बचपन में पैगंबर इब्राहिम अपने पिता को मूर्ति बनाते हुए देखा करते थे अपनी छोटी उम्र में पैगंबर इब्राहिम को लगता था कि इन मूर्तियों की पूजा करना गलत है जिन्हें हमने अपने हाथों से ही बनाया है ! जब पैगंबर इब्राहिम लोगों को मूर्ति के सामने प्रार्थना करते हुए देखते तो वह उलझन में पड़ जाते उन्हें यह देखकर आश्चर्य होता की जिन मूर्तियों को मेरे पिता ने बनाया है वह उनके सामने प्रार्थना करते हैं !

एक दिन पैगंबर इब्राहिम ने अपने बाप से यह पूछने की यह लोग इन से मूर्तियों की प्रार्थना क्यों करते हैं जिन मूर्ति को आप बनाते हैं मुझे बिल्कुल समझ में नहीं आता आप बताइए ना ऐसा क्यों करते हैं वह लोग उनके बाप ने जवाब दिया कि वह हमारे ईश्वर हैं उनकी दुआएं लेने के लिए तुम्हें भी उन्हें मानना चाहिए पैगंबर एक मूर्ति की तरफ इशारा करते हुए कहा आखिर यह है कौन उन्होंने कहा है मूर्ति खुदाओं के खुदा मर्दूक का है जब उन्होंने यह सुना तो वह अपने मन में हंसने लगे ! समय के साथ इब्राहिम बड़े होते गए और , और भी ज्यादा समझदार हो गए वह जानते थे कि मूर्ति की प्रार्थना बिल्कुल गलत है पर पैगंबर इब्राहिम को पता ही नहीं था कि आखिर खुदा है कौन !

एक दिन पैगंबर इब्राहिम ने अपना घर छोड़ दिया क्योंकि वह तलाश करना चाह रहे थे आखिर खुदा है कौन !
तो जब वह चलते-चलते पहाड़ी के पास पहुंचे तो वहां पर गुफा देखी और उस गुफा के पास जाकर बैठ गए क्योंकि वह चलते-चलते बहुत थक गए थे ! कुछ समय बाद रात हो गई ! जब पैगंबर इब्राहिम अपनी आंख आसमान की तरफ ले गए तब उन्होंने देखा की आसमान में बहुत सारे सितारे चमक रहे हैं तो पैगंबर इब्राहिम ने सोचा यही असली खुदा है लेकिन सितारे कुछ देर के बाद छुप गए तो पैगंबर इब्राहिम ने सोचा कि यह खुदा तो नहीं है क्योंकि सच्चे खुदा छुपते नहीं है

फिर थोड़ी देर के बाद चांद आसमान में आया उस अंधेरी रात में पैगंबर इब्राहिम को चांद को देखना अच्छा लग रहा था फिर पैगंबर इब्राहिम को लगा शायद चांद ही असली खुदा है वह वहां बैठे रहे और काफी देर तक चांद को देखते रहे पर जब कुछ देर बाद चांद भी आसमान से ढल गया फिर उन्हें महसूस हुआ कि शायद चांद भी असली खुदा नहीं है फिर पैगंबर इब्राहिम बहुत उदास हो गए और वह घंटो वहां बैठे रहे और आसमान की तरह देखते रहे जब सुबह हुई तो उन्होंने सूरज को आसमान में देखा तो उन्होंने सोचा कि यह सूरज की असली खुदा है क्योंकि वह बहुत बड़ा था और इससे उजाला भी आता है लेकिन जब शाम को सूरज भी डर गया तो उन्हें यह मालूम पड़ा कि यह भी खुदा नहीं है क्योंकि सच्चा सौदा कभी छुप नहीं सकता तब अचानक उनके दिमाग में एक बात आई की असली खुदा को देखा ही नहीं जा सकता अरुण विश्वास हो गया कि वह खुदा ही है जिन्होंने शब्द की उत्पत्ति की है सूरज चांद सितारे और बाकी सब चीज है उस खुदा ने नहीं बनाई है जो दिखता नहीं है और उनके दिमाग में यह बात भी गई कि उस खुदा का नाम अल्लाह है और उसी ने सब चीजों को बनाया है !

फिर अगले दिन पैगंबर अपने घर चले गए घर जाकर उन्होंने अपने पिता से बताया जो उन्होंने समझा और जाना था यह सब सुनकर पैगंबर के पिता खुश ना हुए ! उनके पिता ने कहा कि मेरे ना मानने की तुम्हारी हिम्मत कैसे हुई और गुस्सा होते हुए कहा लोग तुम्हें पत्थर मारेंगे अगर लोगों ने यह बात सुन ली तो पैगंबर इब्राहिम ने अपने पिता को बहुत समझाने की कोशिश करी लेकिन पैगंबर के पिता ने उन पर कोई ध्यान नहीं दिया और उनके पिता ने कहा कि यह घर छोड़ दो और यहां से चले जाओ फिर पैगंबर ने अल्लाह के द्वारा दंड दिए जाने के बारे में बताया लेकिन उनके पिता ने फिर भी उस पर ध्यान नहीं दिया यह बात सुनकर पैगंबर काफी निराश हो गए हैं कि उन्हें घर से निकाल दिया गया है और वह समझ गए थे कि यह उनकी परीक्षा की घड़ी थी लेकिन वह जानते थे कि लोगों को अल्लाह के पास लेकर आना पैगंबर इब्राहिम आसपास के शहरों में गए और लोगों को अल्लाह का संदेश बताया की तुम लोगों को मूर्ति की पूजा नहीं करनी चाहिए यह असली खुदा नहीं है क्योंकि असली खुदा तो अल्लाह है और अल्लाह ही तुम्हारा मालिक है अल्लाह के अलावा तुम्हारा कोई मालिक नहीं है और किसी के आगे सर मत झुकाओ सिवाय अल्लाह के क्योंकि अल्लाह के अलावा कोई और मालिक नहीं है और अल्लाह के अलावा कोई और प्रार्थना के लायक नहीं है इसलिए किसी और के आगे सर मत झुकाओ जब लोगों ने यह बात सुनी तो वह बहुत गुस्सा हो गए और उन्हें वहां से जाने के लिए कहा !

शहर में वह एक खुशहाली की रात थी जिस दिन सभी लोग खुशाली मनाने के लिए इकट्ठा हुए थे तभी पैगंबर इब्राहिम के दिमाग में एक बात आई यह बात साबित करने के लिए की मूर्ति मैं कोई शक्ति नहीं होती उन्होंने एक कुल्हाड़ी ली और जहां मूर्तियां रखी थी उस तरफ चले गए और एक कमरे में पहुंचे और वहां पर जितने भी मूर्तियां रखी हुई थी उन सबको तोड़ दिया सिवाय एक मूर्ति के ! उन्होंने अपनी कुल्हाड़ी एक मूर्ति के गले में फंसा दी और वहां से चले गए जब लोग अगली सुबह वहां पर प्रार्थना की जगह पर आए तो वह लोग आश्चर्य में पड़ गए उन्होंने सारी मूर्तियों के टुकड़े जमीन पर पड़े हुए देखें वह लोग यह बात समझ नहीं पा रहे थे कि यह किसने किया तभी उनमें से एक ने कहा की मुझे विश्वास है कि यह सब पैगंबर इब्राहिम का काम है क्योंकि वह हमारे खुदा के खिलाफ बोल रहा था लोगों ने पैगंबर इब्राहिम को ढूंढा और उन्हें प्रार्थना की जगह पर बुलाया लोगों ने पैगंबर इब्राहीम से कहा क्या तुम ने ही हमारी मूर्तियों को तोड़ा है इब्राहिम निश्चिंत थे उन्होंने बड़ी खूबसूरती से जवाब दिया की उस बड़ी मूर्ति से पूछो जिसके गले में यह कुल्हाड़ी फसी हुई है शायद उसे पता होगा क्योंकि अगर उसे पता होगा तो वह तुम्हें बता देगी कि इन मूर्तियों को किसने तोड़ा है इन लोगों ने कहा मूर्ति कैसे बोल सकती है जो पत्थर और लकड़ी से बनी हुई है इसके जवाब में पैगंबर इब्राहिम ने कहा तो फिर क्यों तुम क्यों इसकी पूजा करते हो जो कि ना सुन सकते हैं ना वह बोल सकते और ना ही देख सकते हैं यह सब जानते हुए भी तुम इसकी प्रार्थना क्यों करते हो क्या तुम पागल हो गए हो कुछ लोगों को विश्वास हो गया कि पैगंबर इब्राहिम सच कह रहे हैं फिर भी कुछ लोग उनसे बहुत गुस्से में थे !

वह लोग चिल्ला रहे थे इसे दंड दो क्योंकि इसने हमारी मूर्तियों को तोड़ा है उन्होंने पैगंबर वीडियो में बांध दिया और उनकी चारों तरफ खड़े होकर उनके दंड के बारे में बात करने लगे भाग खड़े हुए लोगों में से एक आदमी बोला उसे आग में फेंक दो जो आग बहुत विशाल हो और आज तक उतनी विशाल आज किसी ने ना देखी हो उसी में पैगंबर इब्राहिम को डाल दो सब को लगा कि यही सबसे अच्छा तरीका है !

सबसे पहले आग जलाने के लिए उन्होंने एक बहुत विशाल गड्ढा खोदा जिसमें जलाने के लिए बहुत सारी लकड़ियां डाली जाए और जहां जहां से संभव था उन्होंने वहां से लकड़ियों को इकट्ठा किया और गड्ढे में डाल दिया तब तक वहां पर वह लोग लकड़िया डालते रहे जब तक कि वहां पर लकड़ियों का पहाड़ नहीं खड़ा हो गया और एक दिन उन्होंने इस में आग लगा दी वह आसमान को छूने वाली एक बहुत बड़ी आग बन गई कहा जाता है कि उसकी लपट के कारण कोई भी उसके आसपास जाने की जुर्रत नहीं कर रहा था यहां तक कि पक्षी भी उसके आसपास पर नहीं मार पा रहे थे अगले दिन वह पैगंबर को आंख में फेंकने के लिए लेकर आए लेकिन परेशानी यह थी कि कोई भी लपट के कारण उसके पास नहीं जा पा रहा था वह सोचने लगे कि वह वह पैगंबर को आग में कैसे देखेंगे जब कोई उसके पास जा ही नहीं पा रहा तो वह आपस में बातचीत करने लगे वहां खड़े हुए लोगों में से एक आदमी ने कहा क्या हमें गुलेल बनानी चाहिए और गुलेल की मदद से हम पैगंबर को आग में फेंक सकते हैं उसके बाद सब लोग गुलेल बनाने में लग गए जब गुलेल बन गई तब उन लोगों ने पैगंबर इब्राहिम को बांध दिया और उन्हें गुलेल पल बैठा दिया जब उन्होंने गुलेल की उसकी रस्सी काठी तो पैगंबर उछलते हुए आग की तरफ चले गए हवा में ही पैगंबर के सामने एक फरिश्ता गया और उनसे पैगंबर इब्राहिम की इच्छा के बारे में पूछा तो पैगंबर ने कहा मैं चाहता हूं की अल्लाह पाक मुझसे हमेशा खुश रहे जबकि वह यह कह सकते थे कि उनकी जान बचाई जाए पर उन्होंने ऐसा नहीं कहा पर वह आग में गिर गए गिरने के बाद पैगंबर को आग छू ना सकी और उन लोगों ने जिन रस्सियों से पैगंबर को बांधा था वह जल गई पर पैगंबर इब्राहिम को आग छू ना सकी पैगंबर आग में ही बैठे रहे और वही बैठे-बैठे अल्लाह की प्रार्थना की लोगों ने सोचा आग में पैगंबर तो जल गए होंगे फिर भी वह लोग आग के बुझने का इंतजार कर रहे थे और जब की आग बुझी तो वह लोग यह देखकर आश्चर्य में पड़ गए कि पैगंबर बिल्कुल सही सलामत बैठे हुए हैं यह सब देख कर वह लोग चिल्लाए और कहने लगे यह तो एक चमत्कार है शायद उसके अल्लाह ने उसे बचा लिया उनमें से कुछ लोगों को विश्वास हुआ की पैगंबर के अंदर कुछ तो जादुई ताकत है लेकिन उनमें से कुछ लोग मूर्ति के तोड़े जाने से बहुत ज्यादा नाराज थे उन्होंने पैगंबरों को बोडियौ मैं बांध दिया और राजा के दरबार ले गए !

क्या आप जानते हैं पैगंबर इब्राहिम के साथ राजा के दरबार में क्या हुआ अगर आप जानना चाहते हैं तो नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें अस्सलामवालेकुम !

                                                 Part - 2 is Coming Soon






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